भारत में पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) का मुद्दा अक्सर परिवारों में विवाद का सबसे बड़ा कारण बन जाता है। किसे कितना अधिकार मिलेगा? बेटियों की हिस्सेदारी क्या है? नाबालिग बच्चों का अधिकार क्या होता है?—ऐसे कई सवाल अक्सर सामने आते हैं।
भारत में पैतृक संपत्ति के कानून (Ancestral Property Laws in India) – सरल हिंदी में पूरी जानकारी
भारत में पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) का मुद्दा अक्सर परिवारों में विवाद का सबसे बड़ा कारण बन जाता है। किसे कितना अधिकार मिलेगा? बेटियों की हिस्सेदारी क्या है? नाबालिग बच्चों का अधिकार क्या होता है?—ऐसे कई सवाल अक्सर सामने आते हैं।
भारतीय कानून, संविधान और न्यायालयों के फैसले इन सवालों का स्पष्ट उत्तर देते हैं।
यह लेख पैतृक संपत्ति से जुड़े सभी महत्वपूर्ण कानूनी बिंदुओं को सरल भाषा में समझाता है।
पैतृक संपत्ति क्या होती है?
कानून के अनुसार, पैतृक संपत्ति वह होती है जो चार पीढ़ियों से चली आ रही हो—
परदादा → दादा → पिता → पुत्र
इस प्रकार की संपत्ति को Hindu Succession Act, 1956 और Mitakshara School of Law के तहत “Coparcenary Property” कहा जाता है।
मुख्य विशेषता:
➡ पैतृक संपत्ति में जन्म लेते ही अधिकार मिल जाता है—चाहे पुत्र हो या पुत्री।
संविधान का आधार — समानता का अधिकार
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 (Right to Equality) और अनुच्छेद 15(1)—धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव को रोकते हैं।
इसी के कारण 2005 के संशोधन में बेटियों को भी पुत्रों के समान अधिकार दिए गए।
Hindu Succession (Amendment) Act, 2005 — बेटियों को बराबरी का अधिकार
2005 के ऐतिहासिक संशोधन के बाद:
✔ बेटी जन्म से ही coparcener होती है
✔ बेटी को अपने पिता की पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलता है
✔ बेटी उस संपत्ति का विनियोग, विभाजन, विक्रय कर सकती है
✔ शादीशुदा बेटी का अधिकार बना रहता है
सुप्रीम कोर्ट (2020) निर्णय:
यदि पिता 2005 से पहले मर गए हों, तब भी बेटी coparcener मानी जाएगी (कुछ मामलों में स्पष्टता जरूरी है, राज्य और परिस्थिति के आधार पर)।
पैतृक संपत्ति की 4 मुख्य शर्तें
- संपत्ति चार पीढ़ियों से चली आ रही हो
- बिना विभाजन (Undivided) होनी चाहिए
- सभी coparcener का जन्म से अधिकार हो
- किसी एक व्यक्ति द्वारा वसीयत के माध्यम से इसे पूरी तरह नहीं बदला जा सकता
क्या पिता पैतृक संपत्ति किसी के नाम कर सकते हैं?
✖ नहीं — पैतृक संपत्ति को पिता अकेले बेच या किसी एक व्यक्ति के नाम नहीं कर सकते।
✔ हाँ, परिवार की सहमति या कानूनी कारणों से न्यायालय अनुमति दे सकता है।
Self-Acquired vs. Ancestral Property में अंतर
| आधार | पैतृक संपत्ति | स्वयं अर्जित संपत्ति |
|---|---|---|
| स्वामित्व | सभी coparcener | केवल मालिक |
| अधिकार | जन्म से | मालिक की अनुमति से |
| वसीयत | सीमित | पूरी आज़ादी |
| विक्रय | सभी की सहमति आवश्यक | मालिक स्वयं बेच सकता है |
Dayabhaga vs. Mitakshara – दो अलग कानून व्यवस्था
भारत में दो प्रमुख स्कूल हैं:
1. Mitakshara (पूरे भारत में लागू, सिवाय बंगाल के)
- पैतृक संपत्ति में जन्म से अधिकार
- संयुक्त परिवार की अवधारणा मजबूत
2. Dayabhaga (मुख्यतः पश्चिम बंगाल में)
- जन्म से अधिकार नहीं
- पिता की मृत्यु के बाद अधिकार मिलता है
कौन-कौन पैतृक संपत्ति में अधिकार रखते हैं?
✔ पुत्र
✔ पुत्री
✔ नाबालिग बच्चे
✔ गोद लिए हुए बच्चे
✔ दत्तक पुत्र/पुत्री
✔ पोते-नाती (कुछ स्थितियों में)
✖ सौतेले बच्चे (यदि कानूनी गोद न लिया हो)
क्या बहू को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलता है?
सीधे तौर पर नहीं,
लेकिन:
यदि पति का हिस्सा है, तो
✔ पति की मृत्यु के बाद
✔ बहू विधवा के रूप में पति के हिस्से पर अधिकार कर सकती है।
क्या पैतृक संपत्ति बँटवारा रोका जा सकता है?
बँटवारा तब तक रोका जा सकता जब तक:
- संपत्ति नाबालिगों की हो
- न्यायालय से स्टे मिल जाए
- परिवार आपसी समझौते से रोकना चाहे
पैतृक संपत्ति में दावा कैसे करें? (Step-by-Step)
1. संपत्ति के दस्तावेज जुटाएँ
- खसरा/खतौनी
- जमाबंदी
- बिक्री विलेख
- वसीयत (यदि हो)
2. Family Tree (वृक्ष) तैयार करें
3. अपने हिस्से की गणना करें
(कानूनी तरीके से coparcenary share निकालना पड़ता है)
4. कानूनी नोटिस भेजें
6. Civil Court में partition suit दायर करें
7. अदालत द्वारा बँटवारा (Judicial Partition)
या
Mutual Partition (आपसी सहमति) हो सकता है।
क्या पैतृक संपत्ति पर टैक्स लगता है?
✔ बँटवारे पर Tax नहीं लगता
✔ हिस्सेदारी बेचने पर Capital Gain Tax लागू होगा
निष्कर्ष
भारत में पैतृक संपत्ति से संबंधित कानून स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि:
- बेटा हो या बेटी, दोनों को बराबर का अधिकार है
- पैतृक संपत्ति जन्मसिद्ध अधिकार है
- कोई भी सदस्य इसे अकेले बेच या हड़प नहीं सकता
- संविधान का अनुच्छेद 14 और 15 इस समानता को मजबूती देते हैं
कानून पारिवारिक संपत्ति के न्यायपूर्ण वितरण का समर्थन करते हैं और विवादों को रोकने हेतु विस्तृत प्रावधान भी उपलब्ध कराते हैं।
FAQs – पैतृक संपत्ति कानून से जुड़े आम सवाल
1. क्या बेटी शादी के बाद भी पैतृक संपत्ति में हिस्सा ले सकती है?
हाँ, 2005 संशोधन के बाद बेटी का अधिकार शादी के बाद भी बना रहता है।
2. क्या दादा की संपत्ति में पोते का अधिकार होता है?
हाँ, यदि संपत्ति पैतृक है तो पोते को अधिकार जन्म से मिलता है।
3. क्या पिता पैतृक संपत्ति बेच सकते हैं?
बिना पारिवारिक सहमति नहीं।
4. क्या गोद लिए बच्चे को पैतृक संपत्ति का अधिकार है?
हाँ, गोद लिया बच्चा सगे बच्चे के बराबर अधिकार रखता है।



