FIR कैसे दर्ज करें और पुलिस के मना करने पर क्या करें?

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भारत में आम नागरिकों के लिए एफ़आईआर दर्ज करना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण अनुभव हो सकता है। कई बार पुलिस एफ़आईआर दर्ज करने से कतराती है या शिकायत लेकर टालमटोल करती है। इस लेख में हम जानेंगे कि FIR क्या होती है, इसे दर्ज कराने की प्रक्रिया क्या है, और अगर पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार करे तो आपके पास कौन-कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं।

एफ़आईआर (FIR) कैसे दर्ज करें और पुलिस के मना करने पर क्या करें? – पूरा कानूनी गाइड

भारत में आम नागरिकों के लिए एफ़आईआर दर्ज करना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण अनुभव हो सकता है। कई बार पुलिस एफ़आईआर दर्ज करने से कतराती है या शिकायत लेकर टालमटोल करती है। इस लेख में हम जानेंगे कि FIR क्या होती है, इसे दर्ज कराने की प्रक्रिया क्या है, और अगर पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार करे तो आपके पास कौन-कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं।


FIR क्या है? – आसान भाषा में समझें

FIR यानि First Information Report भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत किसी भी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की पहली सूचना है, जिसे पुलिस अपराध की जांच शुरू करने के लिए दर्ज करती है।

CrPC (Code of Criminal Procedure), 1973 की धारा 154 के अनुसार, संज्ञेय अपराध की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है।


संविधान में आपके अधिकार

1. अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार

एफ़आईआर दर्ज कराने के मामले में हर व्यक्ति को समान व्यवहार मिलना चाहिए।

2. अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार

अगर अपराध आपके जीवन, स्वतंत्रता या सुरक्षा को प्रभावित करता है, तो FIR दर्ज न करना आपके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

3. अनुच्छेद 22 – गिरफ्तारी एवं हिरासत के दौरान अधिकार

कानून-व्यवस्था से संबंधित मामलों में पुलिस की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ये अधिकार महत्वपूर्ण हैं।


FIR दर्ज करने की प्रक्रिया (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

1. निकटतम पुलिस स्टेशन जाएं

आपको उसी थाने में FIR दर्ज करानी चाहिए जिसके अधिकार क्षेत्र में अपराध हुआ है। लेकिन अगर आप मानसिक या शारीरिक स्थिति के कारण वहाँ नहीं जा सकते, तो किसी भी पुलिस स्टेशन में जानकारी दी जा सकती है (Zero FIR)।

2. अपनी शिकायत मौखिक या लिखित रूप में दें

CrPC की धारा 154(1) के तहत:

  • शिकायत लिखित हो सकती है
  • या मौखिक, जिसे पुलिस अधिकारी लिखकर आपको पढ़कर सुनाए

शिकायत में शामिल करें:

  • घटना की तारीख व समय
  • स्थान
  • क्या हुआ
  • अपराध से जुड़े व्यक्ति
  • उपलब्ध सबूत/गवाह

3. FIR नंबर और कॉपी लेना न भूलें

कानून के अनुसार:

  • FIR दर्ज होने के बाद आपको नि:शुल्क कॉपी मिलना आपका अधिकार है।
  • FIR नंबर भविष्य में केस की प्रगति ट्रैक करने के लिए महत्वपूर्ण है।

Zero FIR क्या है?

अगर अपराध किसी दूसरे क्षेत्र में हुआ है जहाँ आप पहुँच नहीं सकते, तो Zero FIR दर्ज की जाती है।
CrPC में यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि:

  • शिकायत को विलंब किए बिना दर्ज किया जा सके
  • बाद में केस संबंधित थाने को ट्रांसफ़र किया जा सके

यह विशेष रूप से महिला अपराधों, मेडिकल इमरजेंसी, दुर्घटनाओं आदि में उपयोग किया जाता है।


अगर पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार करे तो क्या करें? (आपके कानूनी विकल्प)

1. शिकायत उच्च अधिकारी को दें – CrPC धारा 154(3)

अगर SHO FIR दर्ज नहीं करता:
→ आप लिखित शिकायत SP/Commissioner या जिला पुलिस मुख्यालय में दे सकते हैं।
उच्च अधिकारी FIR दर्ज करने या जांच के आदेश देने के लिए बाध्य हैं।

2. मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दें – CrPC धारा 156(3)

यदि पुलिस और SP दोनों कार्रवाई नहीं करते:
→ आप सीधे ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट से आदेश मांग सकते हैं कि वे पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दें।

यह विधिक रूप से बेहद प्रभावी उपाय है।

3. ऑनलाइन FIR या ई-शिकायत दर्ज करें

कई राज्य अब ऑनलाइन FIR सुविधा प्रदान करते हैं, जैसे:

  • दिल्ली पुलिस
  • महाराष्ट्र पुलिस
  • यूपी पुलिस
    आप गैर-संज्ञेय मामलों (NC) में भी ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं।

4. NHRC, SHRC या महिला आयोग में शिकायत करें

यदि मामला मानवाधिकार, महिला अपराध या पुलिस की लापरवाही से जुड़ा है, तो:

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
  • राज्य महिला आयोग
    में शिकायत कर सकते हैं।

5. पुलिस अफ़सर पर कार्रवाई की मांग (सुप्रीम कोर्ट निर्देश)

सुप्रीम कोर्ट ने Lalita Kumari vs Govt. of UP (2013) केस में कहा है कि:

  • संज्ञेय अपराध की सूचना मिलते ही FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
  • FIR दर्ज न करने वाला अधिकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी है।

पुलिस FIR क्यों नहीं लिखती? (सामान्य कारण)

  • मामला “सिविल डिस्प्यूट” बताकर टालना
  • कथित “सबूत नहीं हैं” कहना
  • अपराध की गंभीरता कम बताना
  • प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़े मामलों में दबाव

लेकिन याद रखिए:
कानून FIR दर्ज करने के अधिकार पर कोई समझौता नहीं करता।


महत्वपूर्ण टिप्स

✔ FIR दर्ज करने जाते समय दो प्रतियां साथ रखें
✔ घटना के सबूत (फोटो, वीडियो, मैसेज) साथ रखें
✔ किसी गवाह को साथ ले जाएं
✔ बातचीत की रिकॉर्डिंग कानूनी रूप से अनुमति योग्य हद तक रखें
✔ FIR दर्ज न करने पर तुरंत लिखित शिकायत करें


निष्कर्ष

FIR दर्ज करना हर नागरिक का कानूनी और मौलिक अधिकार है। भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता और संविधान दोनों इस अधिकार की गारंटी देते हैं। यदि पुलिस शिकायत दर्ज करने से इनकार करे, तो कानून आपको कई विकल्प देता है—SP, मजिस्ट्रेट, ऑनलाइन पोर्टल, या मानवाधिकार आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश तक।

“अपराध की रिपोर्ट करना आपका कर्तव्य है, और FIR दर्ज करना पुलिस का।”


FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या पुलिस Zero FIR दर्ज करने से मना कर सकती है?

नहीं। संज्ञेय अपराध में Zero FIR दर्ज करना अनिवार्य है।

2. FIR की कॉपी लेने के लिए कोई शुल्क है?

नहीं, FIR की कॉपी पूरी तरह मुफ्त है।

3. क्या व्हाट्सएप पर शिकायत से FIR दर्ज हो सकती है?

कई राज्यों में व्हाट्सएप/ईमेल शिकायत स्वीकार की जाती है, लेकिन आधिकारिक FIR दर्ज करने के लिए थाने जाना आवश्यक है।

4. क्या FIR दर्ज न करने पर पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हो सकती है?

हाँ, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार कार्रवाई संभव है।



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