भारत में महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अब पुराने IPC (Indian Penal Code) की जगह नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है। 1 जुलाई 2024 से लागू हुए इन नए कानूनों ने घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया को नया स्वरूप दिया है।

घरेलू हिंसा केवल मारपीट तक सीमित नहीं है। किसी महिला को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना, आर्थिक रूप से नियंत्रित करना, धमकाना, अपमानित करना या दहेज के लिए दबाव बनाना भी घरेलू हिंसा की श्रेणी में आता है। भारत में हजारों महिलाएं हर साल ऐसे उत्पीड़न का सामना करती हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण कई बार वे कानूनी सहायता नहीं ले पातीं।
इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि घरेलू हिंसा के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 के तहत महिलाओं को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त हैं।
घरेलू हिंसा क्या है?
घरेलू हिंसा का मतलब केवल शारीरिक हिंसा नहीं है। कानून के अनुसार निम्न प्रकार के व्यवहार घरेलू हिंसा माने जाते हैं:
- शारीरिक मारपीट
- मानसिक उत्पीड़न
- गाली-गलौज और अपमान
- दहेज के लिए दबाव
- आर्थिक नियंत्रण
- लगातार धमकी देना
- जबरदस्ती संबंध बनाना
- महिला को परिवार और समाज से अलग करना
घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के अनुसार शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, यौन और आर्थिक शोषण सभी घरेलू हिंसा की श्रेणी में आते हैं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) में घरेलू हिंसा से जुड़े प्रमुख प्रावधान
पति या ससुराल द्वारा क्रूरता
पुराने IPC की धारा 498A अब BNS की धारा 84 के रूप में लागू है। इसमें पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला पर की गई क्रूरता को अपराध माना गया है।
इसमें शामिल हैं:
- दहेज के लिए प्रताड़ना
- मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न
- आत्महत्या के लिए उकसाना
- लगातार अपमान और धमकी
- आर्थिक शोषण
यदि आरोप साबित होते हैं, तो दोषी को जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
शारीरिक हिंसा और मारपीट
यदि महिला के साथ मारपीट की जाती है, तो BNS के तहत:
- साधारण चोट
- गंभीर चोट
- हमला
- आपराधिक बल प्रयोग
जैसे अपराधों में मामला दर्ज किया जा सकता है।
यदि मेडिकल रिपोर्ट और सबूत उपलब्ध हों, तो केस और मजबूत हो जाता है।
दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु
यदि विवाह के बाद महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है या उसकी संदिग्ध परिस्थिति में मृत्यु हो जाती है, तो BNS में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। शादी के 7 साल के भीतर हुई संदिग्ध मृत्यु को विशेष रूप से गंभीर माना जाता है।
धमकी और डराना
यदि महिला को:
- जान से मारने की धमकी
- बच्चों को छीनने की धमकी
- सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी
- परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी
दी जाती है, तो यह आपराधिक धमकी का मामला बन सकता है।
Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 क्या है?
Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 महिलाओं को तुरंत राहत और सुरक्षा देने के लिए बनाया गया एक विशेष कानून है।
इस कानून के तहत महिला को निम्न अधिकार मिलते हैं:
सुरक्षा आदेश (Protection Order)
अदालत आरोपी को महिला से दूर रहने का आदेश दे सकती है।
निवास का अधिकार
महिला को वैवाहिक घर से जबरन नहीं निकाला जा सकता।
भरण-पोषण (Maintenance)
महिला और बच्चों के लिए आर्थिक सहायता दिलाई जा सकती है।
मुआवजा
मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा मांग सकती है।
बच्चों की कस्टडी
अदालत अस्थायी रूप से बच्चों की कस्टडी महिला को दे सकती है।
मेडिकल और आश्रय सहायता
जरूरत पड़ने पर महिला को मेडिकल सुविधा और शेल्टर होम की सहायता मिल सकती है।
घरेलू हिंसा की शिकायत कहाँ करें?
यदि कोई महिला घरेलू हिंसा का शिकार है, तो वह इन जगहों पर शिकायत कर सकती है:
- महिला थाना
- स्थानीय पुलिस स्टेशन
- महिला हेल्पलाइन 181
- राष्ट्रीय महिला आयोग
- Protection Officer
- न्यायालय / Magistrate Court
घरेलू हिंसा के मामलों में कौन-कौन से सबूत जरूरी हैं?
मजबूत सबूत केस को मजबूत बनाते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:
- मेडिकल रिपोर्ट
- चोट की फोटो
- ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग
- WhatsApp चैट
- कॉल रिकॉर्डिंग
- गवाह
- धमकी वाले मैसेज
- बैंक रिकॉर्ड (आर्थिक शोषण के मामलों में)
क्या घरेलू हिंसा कानून का दुरुपयोग भी होता है?
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि कुछ मामलों में 498A और घरेलू हिंसा कानून का दुरुपयोग भी देखा गया है, लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि दुरुपयोग की संभावना के कारण कानून को खत्म नहीं किया जा सकता।
अदालतों ने कहा है कि जांच एजेंसियों को हर मामले में निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और बिना पर्याप्त सबूत के किसी को आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए।
घरेलू हिंसा होने पर तुरंत क्या करें?
यदि कोई महिला घरेलू हिंसा का सामना कर रही है, तो उसे:
- तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए
- मेडिकल जांच करवानी चाहिए
- सबूत सुरक्षित रखने चाहिए
- पुलिस या हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए
- किसी अनुभवी वकील से कानूनी सलाह लेनी चाहिए
निष्कर्ष
घरेलू हिंसा केवल पारिवारिक मामला नहीं बल्कि एक गंभीर कानूनी अपराध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और न्याय दिलाने के लिए मजबूत कानूनी अधिकार प्रदान करते हैं।
यदि आप या आपका कोई परिचित घरेलू हिंसा का शिकार है, तो चुप न रहें। सही कानूनी सलाह और समय पर कार्रवाई आपके अधिकारों की रक्षा कर सकती है।
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यदि आपको घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, भरण-पोषण, तलाक या महिला अधिकारों से जुड़े मामलों में कानूनी सहायता चाहिए, तो अनुभवी कानूनी सलाह लेना बेहद जरूरी है।
Vandana Legal Aid महिलाओं के अधिकारों और पारिवारिक मामलों में कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करता है।


